अबयज़ ख़ान

अदालत में अजीब मुकदमा
गवाह भी बकरी
और सबूत भी बकरी


मामला समझ से थोड़ा परे चला जाता है लेकिन यही है इस मुकदमे की हकीकत...एक बकरी के मालिकाना हक के लिए चला ऐसा केस जिसमें फैसला भी बकरी की गवाही से ही हुआ
दरअसल इस अजब गजब मुकदमे की शुरुआत हुई एक बकरी पर हुए विवाद से...

खंडवा के अकबर ने गजराज नाम के एक शख्स से 3700 रुपए में एक बकरा खरीदा था...लेकिन जब अकबर इस बकरे को बेचने के लिए बाज़ार में गया तो विनोद बारेला नाम के एक शख्स ने बकरे पर अपना मालिकाना हक जता दिया
विनोद के इल्जाम के मुताबिक अकबर का बकरा दरअसल उसका था जो चार दिन पहले गुम हो गया था...और इसी वजह से विनोद ने अकबर और गजराज के खिलाफ चोरी का मुकदमा भी दर्ज करवा दिया था
जिसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को पकड़ लिया था
बकरी चोरी का इल्जाम लगते ही अकबर सकते में आ गया...क्योंकि ये साबित करना बहुत मुश्किल था कि बकरा उसका है और उसने बकरा चोरी नहीं किया था...खुद को बचाने के लिए अकबर ने कोर्ट की शरण ली औऱ फिर शुरु हुआ ये अजीबोगरीब मुकदमा



तस्वीरें उसी वक्त की हैं जब दोनों पक्षों के साथ बकरियों और बकरे को कोर्ट में पेश किया गया था...इन तस्वीरों में आप देख सकते हैं कैसे ये तीनों कोर्ट के सामने खड़े हैं...इस अजीबोगरीब मुकदमे को देखने के लिए लोगों की भीड़ भी मौजूद थी....

अदालत के सामने दोनों पक्ष दो बकरियों को लेकर आए औऱ दोनों का दावा था कि उनके पास विवादित बकरे की असली मां थी
मामला पेचीदा था औऱ मुश्किल भी...विवादित बकरा काले  रंग का था और जिन बकरियों को मां बताने का दावा किया जा रहा था वो दोनों भी काली थीं...जज साहब के लिए भी फैसला देना आसान नहीं था...



इस मुश्किल से निकलने के लिए एक अनोखा तरीका निकाला गया...बकरे को दोनों बकरियों के साथ छोड़ देने का फैसला किया गया और माना गया कि बकरा जिस बकरी के पास चला जाएगा वही उसकी मां है और उसी का मालिक बकरे का असली मालिक होगा
और फिर मुकदमा आगे बढ़ा.,..देखिए कैसे इन दोनों बकरियों के पास इस बकरे को छोड़ दिया गया है...हर कोई सांसें थामें इस मंजर को देख रहा था...क्योंकि लोग इस नायाब मुकदमे का नतीजा जानना चाह रहे थे...और फिर आखिरकार वो लम्हा आ ही गया जब बकरे ने अपनी मां को पहचान लिया...देखिए कैसे ये छोटा बकरा धीरे धीरे चलते हुए अपनी असली मां के पास चला गया...

जिस बकरी के पास ये बकरा गया था वो गजराज की थी जिसने अकबर को बकरा बेचा था...और ये देखने के बाद कोर्ट ने फैसला सुना दिया कि अकबर ही बकरे का असली मालिक है और गजराज ने अकबर को बकरा बेचा था ना कि चुराया था
एक बकरी के जरिए चोरी के मुकदमे का फैसला...इससे पहले शायद ही कभी ऐसा हुआ हो...लेकिन खंडवा की अदालत के इस फैसले ने दो बेगुनाहों को सजा मिलने से बचा लिया खंडवा के लोगों के लिए ये अनोखा केस था लेकिन अदालत और जज की सूझबूझ ने इस अजीब से दिख रहे केस को भी सुलझा दिया
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