अबयज़ ख़ान
हमारे मुहल्ले के नुक्कड़ पर जुम्मन मियां की साईकिल की दुकान है... अपने ज़माने के बिंदास और बांके जवान रहे जुम्मन मियां की उम्र साईकिलों का पंचर जोड़ने में ही बीत गई... मियां की दुकान क्या थी, दरअसल मौहल्ले के भटके हुए लड़कों का अड्डा थी.. कईयों की आंखे तो उनकी दुकान पर बैठे-बैठे ही लड़ गईं... उनकी दुकान पर बैठकर मटरगश्ती करने वाले कई लड़के उनकी आंखों के सामने ही अपने बच्चे को उंगली पकड़कर स्कूल ले जाते हैं...और जुम्मन मियां आंहे भरकर रह जाते हैं... उम्र का पचासवां बसंत है और मियां जुम्मन के सिर अब तक सेहरा नहीं बंधा है.... अपने ज़माने में मौहल्ले के बिंदास लड़कों में शुमार था उनका... कुछ लड़कियों को उन्होंने नापसंद किया, कुछ उन्हें नापसंद कर गईं.. यही करते-करते उम्र पचास के आंकड़े पर पहुंच गई... अब हालत ये कि उन्हें शादी के लिए कोई पूछता नहीं, तिस पर जर्मनी के वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च करके उनकी नींद उड़ा दी... पिछले दिनों कई अख़बारों में ख़बर छपी थी कि अब शादी के बाद बच्चे पैदा करने में आदमियों का कोई रोल नहीं होगा... जर्मनी के वैज्ञानिकों ने बाकायदा एक रिसर्च में इस बात का दावा कर दिया... कि अब आर्टिफिशल स्पर्म के जरिए महिलाएं बिना मर्दों की मदद के भी मां बन सकती हैं... बहरहाल अगर ये नई खोज कामयाब हो गई तो मर्द निगोड़े तो बेकार हो जाएंगे... क्योंकि अब बच्चे पैदा भी हो जाएंगे और पता भी नहीं चलेगा उनका बाप कौन है... बस यही बात है जो जुम्मन मिंयां को खाये जा रही है... जब भी कोई उनसे शादी की बात करता है, सुनते ही झल्ला जाते हैं... पहले ही उम्र निकली जा रही है...ऊपर से ये मुए साइंटिस्ट, खुद तो शादी करते नहीं... हमारा भी स्कोप खत्म करने पर तुले हैं... लगता है कमबख्त कुदरत के कायदे-कानून ही पलट देंगे... बताओ अब जवान-जवान लड़कों का क्या होगा... किसको ताकेंगे बेचारे... बच्चे कल किसको अब्बा बोलेंगे... पता ही नहीं चलेगा कौन किसकी औलाद है... अब आप ही बताओ शादी करके करेंगे क्या... खाली बाज़ार से सब्ज़ी थोड़े ही लाना है...
2 Responses
  1. Raviratlami Says:

    "...अब आप ही बताओ शादी करके करेंगे क्या... खाली बाज़ार से सब्ज़ी थोड़े ही लाना है..."

    पूछ रहे हैं और बता भी रहे हैं. वैसे अंततः यही तो करना होता है. बस साथ में बीवी के लिए पाउडर लिप्स्टिक मैचिंग चप्पल इत्यादि झोले में और आ जाता है.


  2. बहुत-बहुत शुक्रिया रवि जी, आपकी टिप्पणी शानदार है...