अबयज़ ख़ान
आम चुनाव में मुलायम ने लालू और पासवान से हाथ क्या मिलाया, लगता है मुलायम और उनकी पार्टी 19 वीं सदी में लौट गए। साईकिल पर चलते-चलते मुलायम ने हाथ में लालटेन थाम ली, और झोंपड़ी में आराम फ़रमाने लगे। शायद इसीलिए मुलायम ने ऐलान किया है कि देश से कंप्यूटर और अंग्रेज़ी स्कूल बंद कर देंगे। अरे मुलायम भईया अंग्रेज़ी से इतनी भी क्या नाराज़गी, अपना मुन्ना तो विदेश में पड़ कर आया है, तो अंग्रेज़ी में ही पड़ा होगा। हां इसके पीछे मुलायम की सोच काफ़ी दूरदर्शी लगती है, जब अंग्रेज़ी स्कूल होंगे ही नहीं, तो महंगी फीस भी नहीं होगी। और फीस महंगी नहीं होगी, तो पैरेंट्स भी बेचारे परेशान नहीं होंगे, और उन्हें स्कूलों के बाहर नारेबाज़ी भी नहीं करना पड़ेगी। लेकिन कंप्यूटर बेचारे का क्या कसूर, अरे मुलायम भईया आपने भी तो उम्मीदवारों की लिस्ट लैपटॉप में ही बनाई होगी और तो और जो आपने 19 वीं सदी का मेनीफेस्टो बनाया है, वो भी कंप्यूटर में ही टाइप किया होगा। लेकिन आपका तर्क भी बड़ा लाजवाब है। कंप्यूटर ने रोज़गार के मौके कम कर दिये हैं। कंप्यूटर की वजह से हाथ को काम मिलना बंद हो गया है। लेकिन जनाब गलती मुलायम सिंह की नहीं है। न उनके कारपोरेट सखा अमर सिंह की। अमर सिंह ने पार्टी को सितारों से सजाने की बहुत कोशिश की, फिल्मी सितारों से मन नहीं भरा, तो यूपी में कल्याण सिंह से भी दोस्ती गांठ ली। लेकिन इस मुए मेनीफेस्टो ने सब गुड़-गोबर कर दिया। पता नहीं टाइपिंग में गलती हो गई, या टाइप ही गलत कराया है। या फिर लगता है जिसने मेनीफेस्टो लिखा है, वो फिल्मों की तरह फ्लैश बैक में चला गया। बेचारे ने टाइपराइटर पर टाइप तो 19 वीं सदी में किया, लेकिन जब वो फ्लैशबैक से बाहर आया, तब तक 21 वीं सदी हो चुकी थी, और जल्दबाज़ी में मेनीफेस्टो मीडिया के सामने आ गया। या फिर ऐसा भी हो सकता है कि इस बार मुलायम ने प्रधानमंत्री बनने के लिए जो चौथा मोर्चा बनाया है, ये सब उसकी वजह से हुआ हो। अरे भई उनके दोस्त लालू यादव का निशान तो लालटेन है, और दूसरे सहयोगी रामविलास पासवान का निशान झोपड़ी है। और खुद तो मुलायम सिंह साईकिल पर सवार हैं अब मेनीफेस्टो तो ऐसा बनाना ही था, जो चुनाव निशानों से सूट कर जाए। फिर दोस्तों का ख्याल भी तो रखना था। शायद मेनीफेस्टो को बनाया ही इस हिसाब से गया है कि लालटेन, झोंपड़ी और साईकिल को बढ़िया तरीके से एडजस्ट किया जा सके। अब देखिए घोषणापत्र पर मुलायम के तर्क।



अगर मेनीफेसोटो के हिसाब से चला जाए, तो देश से सबसे पहले बिजली को ही ख़त्म किया जाएगा, क्योंकि जैसे कम्प्यूटर ने रोजगार छीना है, वैसे ही बिजली ने लाखों लोगों को बेरोज़गार कर दिया है। बिजली की वजह से चल रही हैं देश में बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां जिसमें लगी हैं. बड़ी-बड़ी मशीने। और इसमें काम करते हैं लाखों लोग। यानि अगर मुलायम सिंह और अमर सिंह की मानें तो मशीनों की वजह से बहुत से लोग बेरोज़गार हैं। इसलिए अगर उनकी सरकार आई तो वो बिजली भी बंद कर सकते हैं। इससे एक फायदा ये होगा, कि मशीनें अपने-आप हट जाएंगी और फैक्ट्री में काम करेंगे बहुत सारे लोग। लेकिन वो काम कैसे करेंगे, ये कहना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। इतना फायदा ज़रूर होगा, कि देश में एक बार फिर से लालटेन युग शुरु हो जाएगा। पक्के मकानों की जगह लोगों को झोंपड़ी बनाकर दी जाएगी, ताकि उन्हे भूकंप के कुदरती क़हर से निजात दिलाई जा सके। इससे कई फ़ायदे होंगे, एक तो महंगाई के इस ज़माने में लोगों को आराम से मकान सुलभ होंगे, दूसरे सीमेंट और सरिए की बेलगाम होती कीमतों से भी राहत मिलेगी। इसके अलावा साईकिल चलाने से बीमारियां कुछ कम होंगी। पेट्रोल-डीज़ल के प्रदूषण से निजात मिलेगी, तो गरीब लोगों को एक बार फिर से रोज़गार मिल सकेगा। साईकिल मरम्मत की दुकान खोलने के लिए उन्हें सस्ती दर पर लोन भी मिलेगा। इसके अलावा लालटेन का भी बड़ा फायदा होगा, बिजली के भारी-भरकम बिलों से निजात मिलेगी। तेज़ भागते मीटरों पर ब्रेक लगेगा। बिजली के महंगे उपकरणों से छुटकारा मिलेगा। फ्रिज और एसी पर रोक लगेगी, ताकि घड़ा एक बार फिर गर्मी में लोगों का गला तर कर सके। मिट्टी के बर्तनों के दिन फिर से लौटेंगे, एक और फायदा ये होगा, कि जब बिजली नहीं होगी, तो पानी भी नहीं आयेगा, और लोग पानी के लिए चिक-चिक भी नहीं करेंगे। और सबसे बड़ा फायदा ये कि बिजली-पानी के लिए लोग बार-बार सरकार को नहीं कोसेंगे। यानि मेनीफेस्टो में खास ख्याल रखा सरकार का, जिससे उसे आने वाली परेशानियों का सामना न करना पड़े। लेकिन हंगामा करने वाले हैं कि मानते ही नहीं। बात-बात में शोर मचाने लगते हैं। अरे भई मुलायम सिंह ने मेनीफेस्टो बनाया है, तो कुछ सोच-समझकर ही बनाया होगा। फिर इसमें हायतौबा मचाने की क्या ज़रूरत है। जय हो पूंजीपति समाजवादियों की।
4 Responses

  1. Chandeep Says:

    बहुत अच्छा लिखा है....बस मुलायम पढ़ ले....!


  2. मुलायम रहा पहलवान का पहलवान ही


  3. बल्कि मुलायम जी को पढ़वाया जाये! उनका बेटा तो अपनी जेनरेशन का है, उसी से बात कर के देख ली जाये, शायद पिता श्री को समझा पाए.